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Preambal in Indian constitution in Hindi PDF

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BHARAT KE SAWIDHAN KI PRASTAWANA IN HINDI PDF

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हेलो दोस्तों, आज हम आप सभी के लिए Preambal in Indian constitution in Hindi PDF इंडियन पॉलिटी की बहुत ही शानदार पीडीऍफ़ लेकर आये है, जो आपके आने वाली सभी सरकारी परीक्षाओ के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण साबित हो सकती है Preambal in Indian constitution in Hindi PDF इस पीडीऍफ़ में आपको पॉलिटी की सम्पूर्ण जानकारी बतायेगे अगर आपको इस पीडीऍफ़ में किसी तरह की कोई परेशानी आती है तो आप हमे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके बता सकते है.

आज हम Preambal in Indian constitution in Hindi PDF जानेगे, भारत के सविंधान की प्रस्तावना के बारे में जो की समस्त प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए अतयधिक महत्वपूर्ण है.
प्रस्तावना :- भारत का सविंधान एक लिखित दस्तावेज है और इसकी जानकारी हेतु सविंधान के शुरुआत में पूरे सविंधान की एक रुपरेखा के रूप में प्रस्तावना को रखा गया है .हमारी प्रस्तावना सम्पूर्ण सविंधान की मूल भावना को प्रदर्शित करती है .
प्रस्तावना का विचार हमने अमेरिका के सविंधान से लिया है जो की विश्व का प्रथम लिखित सविंधान है और प्रस्तवना की भाषा ऑस्ट्रेलिया के सविधान से ली गयी है .
जैसा की हमने समझा प्रस्तवना सविधान का सार है इसे समझकर हम भारतीय सविधान की मोटी मोटी जानकारी ले सकते है जैसा की इसके शुरुआत में लिखा है की हम भारत के लोग ,,जो ये कहता की हम सब एक है प्रस्तवना हमे ये बताती है की भारत एक सम्पूर्ण प्रभुत्व राष्ट्र है जो अपने आंतरिक और बाहरी प्रत्येक निर्णय लेने में पूर्णतय स्वतंत्र है हम समजवादी है लोकतान्त्रिक पंथनिरपेक्ष और गणतंत्र है भारत के सभी नागरिको को सामजिक आर्थिक एवं राजनैतिक अधिकार प्राप्तः है देश में सभी नागरिक विचार धर्म उपासना का अधिकार रखते है और प्रस्तावना कहती है समस्त भारतीय एक रहे बंधुता भाईचारे की भावना को भढावा दे इन सभी विचारो को प्रस्तावना में समेट कर हमारे सविधान के रचियताओं ने २६/नवंबर /१९४९ को भारतीय सविंधान में प्रस्तावना को सबसे पहले सविधान में स्थान दिया ताकि जब भी कोई हमारे इस सविधान को पढ़े उसे सविधान की मूल भावना समझ आ जाए

भारत के सविंधान में प्रस्तावना का महत्व सर्वाधिक है इसलिय इसे सविधान की आत्मा भी कहते है और ही सविधान रूपी ताले की चाै बी कहा जाता है विश्व का सबसे बड़ा सविंधान भारत का है .
हम प्रस्तावना के कुछ शब्दो को समझते है :जैसे समाजवादी इसका अर्थ है की समाज में सभी वर्गों को एक समानं भाव से देखा जाए किसी के साथ भी भेदभाव न हो इसी प्रकार सभी को राजनितिक स्तर पर सामान रखा गया जैसे हर नागरिक के वोट का एक महत्व है और जनता के वोट से ही सरकार बदल जाती है जो की लोकतंत्र की सबसे बड़ी सकती है I

प्रस्तवना की मूल भावनाओ को सविधान में जगह दी गई है .जैसे राजनितिक अदिखार मूल अधिकार में दिए गए है के निति निदेशक में ार्थिक और सामाजिक अदिकार दिय गए है

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सविधान की प्रस्तावना 1976 में कुछ शब्द नए जोड़े गए इसी समय ४२ वे सविधान संसोधन के तहत समाजवादी पंथनिरपेक्ष और अखंडता जोड़े गए ये आज तक का एक ही बदलाव था प्रस्तावना में सविधान बनाने के बाद पहले ये प्रावधान था की प्रस्तावना सविधान का भाग नहीं था ऐसा कहा गया था पर कुछ परिवर्तनों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बदलाव किये और निर्णय दिए की संसद को पूर्ण स्वतंत्र किया गया वह सविधान मे किसी भी भाग में बदलाव कर सकती है लेकिन सविधान की बेसिक रुपरेखा को नहीं बदला जा सकता ये निर्णय केशवानन्द भारती केस में दिया गया जो आज तक है आर्टिकल 368 संसद को सविधान में बदलाव की अनुमति देता है .

सामाजिक विषय में राजनीति महत्वपूर्ण विषयों में से एक है, इसलिए प्रत्येक उम्मीदवार के लिए हमारे भारतीय राजनीति के बारे में जानना महत्वपूर्ण है।
सभी महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री के साथ सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अपनी तैयारी पहले से शुरू कर दें।
One Liner Questions Answer

  1. लोकसभा के लिए चुनाव में निर्वाचित होने के लिए किसी व्यक्ति के लिए न्यूनतम आयु सीमा है – – 25 वर्ष
  2. 84 वे  संसोधन अधिनियम द्वारा लोकसभा की कुल सदस्य सीटों की संख्या, ।971 की जनगणना के आघार पर कर दी गई है। ये तब तक बदली नहीं जाएगी, जब तक एक वर्ष विशेष के बाद पहली जनगणना नहीं होगी। यह वर्ष विशेष है – 2026
  3. भारत के संविधान में निर्धारित किए गए लोकसभा में सदस्यों की संख्या अधिकतम हो सकती है – 552
  4. लोकसभा के सदस्यों की संख्या 525 से बढ़ाकर 545 कर दी – 31 वें संशोधन ने
  5. भारत के संविधान के अनुच्छेद 82 के अनुसार, लोक सभा की सीटों का राज्यों के मध्य आवंटन……….. जनगणना के आधार पर है। — 1971
  6. लोकसभा में राज्यों को सीटें आवंटित होती है – जनसंख्या आधार पर
  7. इन राज्यों की लोकसभा में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण नहीं है— अरुणाचल प्रदेश, जम्मू तथा कश्मीर, मेघालय
  8. इन राज्यों में अनुसूचित जनजातियों के तिए लोकसभा में स्थान आरक्षित नहीं है- — केरल, तमित्नादु, कर्नाटक
  9. लोकसभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए राज्य में सर्वाधिक आरक्षित सीटें हैं – मध्य प्रदेश में
  10. लोकसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय से सदस्य मनोबीत करने की शक्ति है – भारत के राष्ट्रपति के पास
  11. राज्य विधान समाओं में आंग्ल – भारतीय समुदाय के लिए प्रतिनिधित्व का प्रावधान किया गया है – अनुच्छेद 333 के द्वारा
  12. राष्ट्रपति आंग्ल-भारतीय समुदाय से नामित कर सकता है, यदि वह इस राय का है कि लोक सभा में इस समुदाय का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है — 2 सदस्यों को
  13. राज्यों से निर्वाचित होने वाले लोकसमा के सदस्यों की संख्या में वृद्धि करने से संबंधित हैं – 7 वां तथा 31वां संवैधानिक संशोधन
  14. लोकसभा को कार्यकाल पूरा होने के पहले भंग किया जा सकता है – प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा
  15. लोकसभा के कम से कम सत्र बुलाए जाते हैं – वर्ष में दो बार
  16. लोकसभा और राज्यसभा में गणपूर्ति संख्या है — कुल सदस्य संख्या का 1/10
  17. लोकसमा में सदस्यों की जो अधिकतम संख्या निर्धारित की गई है, वह है — 550
  18. लोकसभा की वर्तमान सदस्य संख्या है — 545
  19. संघीय क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व प्रात्त है. — संसद के दोनों सदनों में
  20. लोकसभा की बैठक समाप्त की जा सकती है — स्थगन द्वारा, सत्राबसान द्वारा, विघटन द्वारा

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